क्या नाता है महात्मा रावण से वाल्मीकि (अनार्य) कौम का ??

क्या नाता है महात्मा रावण से वाल्मीकि (अनार्य) कौम का ??

आदिकवि वाल्मीकि दयावान पावन योगविशिष्ठ कथन में लिखते हैं कि तप, दान, तीर्थ से नहीं मोक्ष कि प्राप्ति केवल ज्ञान से होती है ।‌

 इसी विचार पर अमल करते हुए प्रकृति रक्षक, पशु बलि विरोधी, लंकेश्वर महात्मा रावण का रक्षक दल आर्यो के प्रकृति विरोधी रिती रिवाज वैदिक यज्ञो के खिलाफ रहा क्योंकि यज्ञो में अनाज जलाया जाता था पशुओं कि बली दी जाती थी अन्य तरह कि पाखंडी क्रुप्रथाओं का "महात्मा रावण रक्षक दल" ने विरोध किया और आर्यों के वैदिक यज्ञों को भंग किया और वो कहलाएं "भंगी" 

वाल्मीकि रामायण में भी महात्मा रावण कि विशेषताओं इस प्रकार लिखी गई। 1.एक महान विद्वान वीर , 2.वेद शास्त्रों का ज्ञाता 3.परमात्मा का प्रिय पुत्र 4.नारी रक्षक 4. बलशाली योद्धा आदि प्रकार कि विशेषताओं का वर्णन है। 

एक तर्क प्रमाण और मिलेगा आपको कि वाल्मीकि रामायण में जिन नामों का वर्णन है जैसे - दानव, दैत्य, असुर, भील , अनार्य, नागवंशी , अतिकाय, राक्षस आदि प्रकार के नाम भारत कि किसी जाति के लोग नहीं लगाते अपने नाम के साथ । लेकिन वाल्मीकि क़ौम में दानव, दैत्य, असुर, राक्षस, अनार्य नामों को लगाने वाले लोग आपकों मिलेंगे ज्यादातर पंजाब हरियाणा में जो अपने महापुरुषो के बताएं गये रास्ते पर चलते हैं और स्वीकार करते हैं कि हमारा धर्म आदि धर्म (वाल्मीकि धर्म) है हमारी संस्कृति 'द्रविड़' अनार्य हैं हमारे इष्ट गुरु "सृष्टिकर्ता वाल्मीकि दयावान" है हमारा पावन धर्म ग्रंथ "पावन योगविशिष्ठ" है । वो लोग कभी रावण का विरोध नहीं करते जो अपने इतिहास को जानते है।

इस प्रकार के ऐसे बहुत से तथ्य, तर्क प्रमाण है जो साबित करते हैं कि महात्मा रावण हमारे महापुरुष योद्धा हैं। ऐसे पवित्र आत्मा को नमन एवं श्रद्धांजलि 🙏🏻💐

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